क्या है शील का महत्त्व....... ❔❓❔


कोड का मरीज शरीर को खुजाने तथा तपाने में सुख मानता है, उसी प्रकार कामरोग का मरीज मैथुन संभोग करने में सुख मानता है। यह बडा विपर्यय है; क्योंकि जैसे खुजाने से खाज बढ़ती है, और अंत में कष्टदायक जलन पैदा करती है; वैसे ही स्त्री-सेवन की इच्छा उत्तरोत्तर बढ़ती जाती है और अंत में कष्टदायक होती है।सौधर्म इंद्र अपने जीवन काल में 40 नील (1नील = 10000000000000) शचि इंद्राणियों का भोग करता है फिर भी उसकी तृष्णा शांत नहीं होती है।

शील से ज्यादा कीमती दूसरा इस संसार में कुछ भी नहीं, सब कुछ न्योछावर कर के भी शील को संभालना चाहिए।कहा भी है -

"गिरी वरते गिरेव भलो भलो पकरवो नाग।
आगमाहि जलवो भलो बुरो शील को त्याग॥"


एक बार पर्वत के शिखर से गहरी खाई में कूदना अच्छा, बड़ा नाग हाथों से पकड़ना अच्छा, यदि समय आए तो आग की ज्वाला में जलकर भस्म होना अच्छा; परंतु जब तक तन में चेतन है तब तक पृथ्वी तल पर संभालने जैसा यदि कुछ है तो एकमात्र शील है।

जैन आचार्य कुंदकुंद देव कहते हैं कि ," जो व्यक्ती युवा अवस्था से पूर्ण, दिखने मे सुंदर लावण्ययुक्त, लक्ष्मी-संपदा से गर्वित, मदोन्मत है ; परंतु यदि शील और गुणों से रहित है तो उसका मनुष्य जन्म निरर्थक है।शील से मंडित प्राणी देवों के भी वल्लभ होते हैं। देव भी उनकी सहायता करते हैं। शील ही विशुद्ध तप, दर्शन की शुद्धता, ज्ञान की शुद्धता, विषयों का शत्रु और मोक्ष की सीढ़ी है।"
अंत में कहते है कि," शील से अक्षातीत जिसमें इंद्रिय रहित अतींद्रिय ज्ञान, सुख है ऐसा मोक्ष पद होता है।"

"सीलेण य मोक्खपयं अक्खातीदं य लोयणाणेहिं ॥"
शील बिना तप करना, व्रत धारण करना, संयम पालना मृतक के शरीर समान देखने मात्र का है, कार्यकारी नहीं है। ब्रह्मचर्य पालन करने से मेधा (धारणा शक्ति) कि वृद्धि होती है। शतावधान और सहस्त्रावधान के प्रयोग ब्रह्मचर्य से ही सिद्ध किए जाते हैं। 'मरणं बिन्दुपातेन जीवनं बिन्दुधारणात्' यह ब्रह्मचर्य का मूल सूत्र है। निरंतर स्वाध्याय, तप, शौच और आत्मविशुद्धि में लगे रहने से ब्रह्मचर्य का पालन सुगम हो जाता है। 'तवेसु उत्तमं बंभचेरम् ।' ब्रह्मचर्य सब तपो में उत्तम है, महान तप है, सर्वोत्तम व्रत है और ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में सहायता करने वाला तीसरा नेत्र है। ब्रह्मचर्य का पालन अमृत है तथा इसका नाश मृत्यु है। अधिक क्या कहे ?

"शील धर्म कि नींव है, शील धर्म का प्राण।
बिना शील धारण किए, ना समाधी न ज्ञान ॥"









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    ENGLISH TRANSLATION :


👉 What is the importance of modesty....❔❓❔


The patient of code believes pleasure in scratching and meditating in the body, similarly the patient of Kamrod believes pleasure in sexual intercourse. This is a big reversal; Because itching causes itching, and eventually causes painful irritation; In the same way, the desire for female consumption increases progressively and eventually becomes painful. Saudharma Indra makes 40 Indigo sacrifices to Indranis during his lifetime, yet his craving is not calm.

Nothing is more valuable in this world than modesty, modesty should be handled by sacrificing everything. It is said that -

"गिरी वरते गिरेव भलो भलो पकरवो नाग।
आगमाहि जलवो भलो बुरो शील को त्याग॥"


Forget the fiery ones Once it is good to jump from the summit of the mountain into a deep abyss, it is good to catch a big snake with hands, if the time comes, it is good to be burnt in a flame of fire; But as long as the body is conscious, if there is anything like handling on the earth plane, then there is only modesty.

Jain Acharya Kundakund Dev states that, "A person who is full of youth, beautiful in appearance, lavish, proud of Lakshmi-sampada, is sweet; but if man is devoid of piety and virtue, then his human birth is fruitless. The deities chanted with modesty are also worshiped by the gods. Dev also helps them. Modesty is pure asceticism, purity of philosophy, purity of knowledge, enemy of subjects and ladder of salvation.
And finally says that,"In the absence of modesty, in which there is no imperceptible knowledge, happiness without sensation, such is the post of salvation."


"सीलेण य मोक्खपयं अक्खातीदं य लोयणाणेहिं ॥"

Worshiping without modesty, observing a fast, maintaining self-control is like looking at the body of the deceased, it is not executive. Adhering to celibacy leads to increase in medha (perception power). Experiments of copulation and mating are proved by celibacy. 'Maranam Bindupaten Jeevanam Bindudharanat' This is the basic formula of celibacy. Continuing self-study, penance, defecation and self-purification facilitates the practice of celibacy. 'Tawesu Uttam Bambhacharam.' Brahmacharya is good in all tapas, great tenacity, best fast and is the third eye to help in the field of knowledge and science. The observance of Brahmacharya is nectar and its destruction is death. What to say more?

"शील धर्म कि नींव है, शील धर्म का प्राण।
बिना शील धारण किए, ना समाधी न ज्ञान ॥"

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