शील: स्वरूप और भेद

       

          काम सेवन नाम का एक ही पाप सब पापों को पुष्ट करता है, और क्रोध आदि सभी कषायों को तीव्र करता है; अतः जब भी शील की चर्चा होती है तो ब्रह्मचर्य की प्रधानता से ही वर्णन किया जाता है।
इस शील व्रत को ब्रह्मचर्यव्रत, असिधाराव्रत, सद्व्यवहार, सच्चरित्र, सद्वृत्ति, सदभाव, सदाचरण, अच्छा मिजाज, सद्दृष्टि आदि नामों से भी जाना जाता है।
महात्मा बुद्ध की पूरी शिक्षा त्रिसूत्री में समाई हुई है, जिसमें सबसे पहला सूत्र शील है। वहाँ शील का अर्थ सदाचार, अच्छा आचरण करने को दर्शाता है। बुद्ध ने शील को तीन भागों में विभाजित किया-

1. कायिक शील = शरीर द्वारा किया गया सदाचार।
2. वाचिक शील = वचनों द्वारा किया गया सदाचार। 3.मानसिक शील = मन द्वारा किया गया सदाचार ।

इसप्रकार शरीर, वाणी और मन कि पवित्रता को शील में गर्भित किया।
जैन आचार्य कुंदकुंद देव के अनुसार जीवदया, इंद्रियों का दमन, सत्य, अचौर्य, ब्रह्मचर्य, संतोष, सम्यग्दर्शन, ज्ञान, तप यह सब शील के परिवार है। कहने का तात्पर्य यह है की जिनके पास उपरोक्त गुण होते हैं; उसका शील भी सुरक्षित रहता हैं ।
आत्मा का परद्रव्य संबंध की अपेक्षा कुशील के 84 लाख दोष और शील के 84 लाख उत्तर गुण बताए गए हैं।
प्रसिद्ध व्यवहार या महिला संबंध की अपेक्षा कुशील के 18000 भेद और उनकी अनुपस्थिति कि अपेक्षा शील के 18000 भेद बताए गए हैं।












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ENGLISH TRANSLATION :

 The same sin called Kama Sevan confirms all sins, and anger intensifies all the problems, so whenever the talk of modesty is mentioned, the predominance of celibacy is described.
This Sheel Vrat is also known by the names Brahmacharyavrata, Aasidharavrata, Sadvyaavar, Satcharitra, Sadvatya, Sadacharan, Satsbhava, Good mood, Sadrishti etc.
The entire teaching of Mahatma Buddha is embodied in Trisutri, in which the first sutra is modesty. Sheel means good behavior, good conduct. Buddha divided the piety into three parts -

1. Kayak modesty = virtue done by the body.
2. Vachic modesty = virtue done by words.
3. Mental modesty = virtue done by the mind.

Thus implied the purity of body, speech and mind in modesty.
According to Jain Acharya Kundakund Dev, Jeevadaya, suppression of senses, truth, achaurya, brahmacharya, contentment, conjugation, knowledge, asceticism are all family of Sheel.This is to say that those who possess the above qualities; His modesty is also safe.
Kusheel's 84 lakh defects and 84 lakh answers of modesty have been told instead of the soul's altruistic relationship.
18000 distinctions of Kusheel than famous behavior or female relation and 18000 distinctions of modesty are mentioned in the absence of them.


















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