शीलरक्षा के लिए मन कि दृढता जरुरी



आज महिलाएं अपने ब्रह्मचर्य व्रत को सुरक्षित तो रखना चाहती है ; लेकिन अपने शरीर को कृत्रिम पदार्थों से संस्कारित करके सुंदर बनाना नहीं छोड़ती। महापुराण में कथन आता है कि जब सीता को रावण हरण करके ले गया था तब सीता रावण के उद्यान में बैठकर विचार करती है -" हे भगवान ! मेरे इस रूप को धिक्कार है ; जिसके कारण मेरे शील पर आपत्ति आई है। मेरा शील खतरे में आ गया । मुझे ऐसा रूप नहीं चाहिए जिसको देखकर लोगों के मन में विकार उत्पन्न हो । हे प्रभु ! मुझे यह रुप नहीं मिलता तो अच्छा था ; जिससे मैं अपने शील को तो अच्छी तरह सुरक्षित रख सकती थी।"आदि अनेक प्रकार से अपने रूप का खेद करती है। लेकिन बड़े दुख की बात है कि आज सीता को आदर्श मानने वाली हमारी बहने स्वयं रूपवती, सुंदर नहीं होने पर भी अपने आप को सुंदर दिखाने के लिए मुंह पर पाउडर , होठों पर लिपस्टिक, नाखूनों पर नेल पॉलिश एवं दांतों को चमकीला बनाने के लिए टूथपेस्ट आदि अनेक सौंदर्य प्रसाधनों का प्रयोग करती है। उन्होंने कभी सोचा भी है कि जो पाउडर, क्रीम आदि वे मुंह पर लगाती है उनमें अंडे की जर्दी आदि हिंसात्मक वस्तुओं का प्रयोग होता है। लिपस्टिक में बंदर के खून का इस्तेमाल किया जाता है। नेल पॉलिश में मछली का तेल तथा 99% प्रतिशत टूथपेस्टों में हड्डियों का चूरा डाला जाता है ? क्या इन पदार्थों का प्रयोग करते हुए हम अपने आप को शाकाहारी कहने के अधिकारी हैं ? माना के समूचे संसार में विषय भोगों को बढ़ावा देने वाली स्थिति अत्यंत तेजी से बढ़ रही है और आगे इसे कहा पूर्णविराम मिलेगा यह बताना असंभव है ; ऐसे में इन सब बातों से अछूते रहना आसान नहीं ; परंतु यह राजमार्ग नहीं । अपने विवेक का प्रयोग करना जरुरी है। यदि सारा संसार आपको कंटकवत् प्रतीत होता हो तो स्वयं अपने पैर में संयमरुपी जूता डालकर बाहर निकलने में ही भलाई है , बुद्धिमानी है। स्त्रियों को 'परनर तातसम' एवं पुरुषों को 'मातृवत् परदारेषु' कि शुद्धदृष्टि रखनी चाहिए। स्मृति वाक्य जो मन की चंचलता के विषय में प्रसिद्ध है -

"मात्रा स्वसा दुहित्रा वा न विवक्तासनो भवेत्।
बलवानिन्द्रियग्रामः विद्वांसमपि कर्षति ॥"

माता भगिनी व पुत्री के साथ एकांत में नहीं बैठना चाहिए ; क्योंकि इंद्रिय समूह (मन ) बड़ा प्रबल है, यह विद्वानों को भी अपनी ओर खींच लेता है।

आयुर्वेद में शील को सुरक्षित रखने के लिए संयम के आठ सूत्र बताए गए हैं।
1.कामुकक्रिया या विचारों को स्मरण करना अथवा पत्नी का स्मरण करना ।
2.कामुक क्रिया एवं अश्लील बातें करना या इससे संबंधी विचार-विमर्श करना ।
3.कामुक छेड़छाड़ ,इशारे , हंसी मजाक या हाथा पाई आदि करना ।
4.छिपकर ऐसे व्यक्ति या दृश्य को देखना जिससे कामोत्तेजना पैदा होती हो।
5. गुपचुप एकांत में छिपकर कामुक बातें करना।
6.कामक्रीड़ा करने का संकल्प करना , विचार करना। 7.कामुक क्रीड़ा के साधन जुटाना।
8.जानबूझकर ऐसा प्रयास या कोई क्रीड़ा करना जिससे वीर्यपात हो।

शीलरक्षा के लिए यह दो हि कार्य करना जरूरी है -
A. संयम के ऊपर बताए गए आठ शत्रुओं से सदा बचे रहना।
B. यदि कभी कामवासना उत्पन्न हो जाए तब विवेक से काम लेकर किसी अन्य कार्य में व्यस्त हो जाना।

'नान्यः पन्था विद्यतेऽनया' इसके सिवा अन्य कोई मार्ग नहीं है। विवेक से काम लेने पर नियम से इंद्रियां वश में होती है । कुशील से बचकर, सुशील का पालन मुझे अच्छे ढंग से करना है , इस प्रकार मन में दृढ़ संकल्प रखते हुए मन को संयमित रखना चाहिए । कहा भी है -

'धैर्य न टूटे, पड़े चोट से घन की ।
यही दशा होनी चाहिए , निज मन की॥'



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ENGLISH TRANSLATION:


Today women want to preserve their celibacy fast;  But she does not stop making her body beautiful by creasing it with artificial materials. In the Mahapuran, the statement comes that when Sita was taken away by Ravana, Sita thinks of sitting in the garden of Ravana - "Oh my God!  ; Because of which my modesty has been objected. My modesty has come under threat. I do not want a form which can cause disorder in the minds of people. Lord, I do not remember this form.  Lata was good; so that I could protect my modesty well if, etc." I regret my form in many ways. But it is very sad that today our sister who considers Sita to be ideal is beautiful, not beautiful  Despite being beautiful, you can use many cosmetics such as powder on the mouth, lipstick on the lips, nail polish on the nails and toothpaste to brighten your teeth.  They have ever thought that the powder, cream etc. that they put on the mouth use violent things like egg yolk etc. Monkey blood is used in lipstick. Fish oil in nail polish and 99  % Percent Toothpastes Are Bones Sawdust?  Are we entitled to call ourselves vegetarian using these substances?  It is believed that the situation promoting subject enjoyment in the whole world is growing very fast and it is impossible to tell that it will get a full stop;  So, it is not easy to remain untouched by all these things;  But this is not a highway.  It is important to use your discretion.  If the whole world seems to be shaky to you, then it is good to go out by putting a restrained shoe on your own foot, it is wise.  Women should keep a pure vision of 'Parnar Tatsam' and men as 'Motherly Pardeshru'.  Smriti sentences which are famous about the fickleness of the mind -

 "Kvata svasa duhitra wa vivaktasano bhavet.
 Balavanindriagram: Vidvansampi Karshati 4 "

 Mother should not sit in seclusion with sister and daughter;  Because the sense group (mind) is very strong, it also attracts scholars.

 In Ayurveda, eight formulations of abstinence have been described to protect piety.
 1. To remember thoughts or thoughts or to remember a wife.
 2. Performing profane actions and obscene talk or discussions related to it.
 3.Communicate manipulation, gestures, laughter jokes or handgrip etc.
 4. Hiddenly looking at a person or scene that produces sexual arousal.
 5. Silently speaking in secret.
 6. Resolve to work, think.  7. Mobilization of instrumental sports.
 8. To make such an effort or any action which causes ejaculation.

 For modesty protection, it is necessary to do two things -
 A. Always abstain from the eight enemies mentioned above.
 B. If sexual desire ever arises, then work with discretion and get busy with any other work.  'Nanyah Pantha Vidyateenya' is no other way than this.  By working with discretion, the senses are subdued by rules.  I have to follow Sushil in a good way, avoiding Kushil, thus keeping the mind determined should keep the mind restrained.  Where is it too?

 'Patience is not broken, the cube is injured.
 This should be the condition, of the personal mind.

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